सबने मिलकर किया 900 करोड़ का घोटाला, 15-15 लाख में बने फर्जी सर्टिफिकेट

हाल ही में जल जीवन मिशन में हुए 900 करोड़ रुपये के घोटाले की खबरें सुर्खियों में आई हैं। यह मिशन, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक साफ़ और सुरक्षित पानी पहुंचाना है, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। इस घोटाले ने आम जनता के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों का ध्यान भी खींचा है।

900 करोड़ घोटाला

900 करोड़ का घोटाला: पूरा मामला

900 करोड़ का जल जीवन मिशन घोटाला: एसीबी ने पूर्व मंत्री समेत 22 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की

राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन में 900 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस मामले की जांच में सामने आया है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे ठेके हासिल कर करोड़ों का घोटाला किया गया। इस खबर ने जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम की साख को गहरा धक्का पहुंचाया है।

घोटाले का पर्दाफाश कैसे हुआ?

इस मामले में सबसे पहली लीड एसीबी को एक प्राइवेट ऑफिस सहायक मुकेश पाठक से मिली, जो अहमदाबाद का निवासी है। एसीबी की पूछताछ में मुकेश ने खुलासा किया कि उसने फर्जी प्रमाणपत्र बनाने के लिए महेश मित्तल और पदमचंद जैन से 15 लाख रुपये लिए थे। इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल जैसी फर्मों ने पीएचईडी (पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट) के ठेके हासिल करने के लिए किया था।

फर्जी सर्टिफिकेट का खेल और टेंडर घोटाला

जांच के दौरान एसीबी ने पाया कि फर्जी प्रमाणपत्रों को असली साबित करने के लिए मुकेश पाठक ने पीएचईडी के सभी कार्यालयों में ईमेल के जरिए सत्यापन का जवाब भी दिया था। जांच में सामने आया कि महेश मित्तल ने मुकेश पाठक से इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के नाम पर फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र बनवाए थे, ताकि टेंडर के लिए आवश्यक पात्रता को पूरा किया जा सके।

घोटाले का विस्तार और एसीबी की कार्यवाही

इस मामले की जांच करते हुए एसीबी को कई सबूत मिले, जिनमें मुकेश पाठक के मोबाइल की जांच के दौरान महत्वपूर्ण कॉल रिकॉर्डिंग्स और बैंक डिटेल्स भी शामिल थीं। बैंक डिटेल्स से यह पुष्टि हुई कि महेश मित्तल ने मुकेश पाठक के बैंक खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर की थी। एसीबी को पता चला कि महेश मित्तल और मुकेश पाठक के बीच जून 2023 में कई बार बातचीत हुई थी, जिसमें फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले को दबाने के लिए इरकॉन के अधिकारियों को रिश्वत देने की चर्चा भी हुई थी।

शिकायतों की अनदेखी और विभागीय लापरवाही

एसीबी की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस घोटाले की शिकायतें पहले भी की जा चुकी थीं। फरवरी 2023 में श्री गणपति ट्यूबवेल के खिलाफ पीएचईडी राजस्थान में शिकायत दर्ज की गई थी कि उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर ठेके हासिल किए हैं। इसके बावजूद विभाग ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा मिला।

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